आज शिक्षक दिवस मनाया गया,लेकिन यह प्रश्न हमेशा मष्तिष्क में गूँजते रहे-

यदि एक भी बच्चा आतंकवादी बनता है, यदि एक भी बच्चा समाज की प्रतियोगिता में पिछड जाता है, यदि एक भी बच्चा अवसादग्रस्त होकर आत्महत्या करता है, यदि एक भी बच्चा आत्मघाती हमलावर बन जाता है, यदि एक भी स्त्री सम्मान को ठेस पहुंचाता है तो समझिए हम शिक्षकों ने अपना काकार्य नहीं किया।हमें आज के दिन आत्मावलोकन करना चाहिए---!!!! सम्मानित होने की सोच तो कतई नहीं--